Wednesday, 10 August 2016

अवसाद (Depression)

आईये जाने अवसाद (Depression) के बारे में!

अवसाद (Depression) क्या होता है?
अवसाद एक रोग-दशा है जो शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। अवसाद कि व्यापकता (prevalence) का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच में से एक महिला और दस में से एक पुरुष अपनी ज़िन्दगी में कभी न कभी एक बार अवसाद से ग्रसित होता है। इसकी किसी एक समय पर दुनिया में व्यापकता लगभग 25 प्रतिशत होती है और विश्व स्वस्थ्य संगठन के मुताबिक 2020 तक व्यापकता के आधार पर यह बिमारी पहले स्थान पर होगी। इसलिए आज के काल में ही हमें इस बिमारी को समझना और समझाना होगा ताकि समय रहते इसका निदान और उपचार कि पहल करके ग्रसित व्यक्तियों को उनकी जीवन कि मुख्यधारा में बनाये रखा जा सके।

अवसाद के लक्षणों में शामिल हैं: (अवसाद के निदान के लिए बताये गए लक्षणों में से ज्यादातर का साथ होना आवश्यक है। अन्यथा इनमें से एक या कम लक्षण हम सामान्य रूप में रोज़मर्रा में महसूस कर सकते है।)
• प्रायहर रोजदिन के ज्यादातर समयउदास महसूस करना,
• जिन कार्यकलापों में पहले आपका मन लगता था उनमें रुचि खत्म या कम हो जाना,
• ताकत की कमी महसूस होना: परन्तु शारीरिक तौर पर किसी बिमारी का न होना,
• सोने की आदतों में बदलाव: जैसे कम नींद, ज्यादा नींद, नींद आने में समय लगना बार बार नींद का टूटना circadian reversal रात कि बजाय दिन में नींद आना,
• भूख में परिवर्तन: कम या ज्यादा लगना भूख रहते हुए भी खाने कि इच्छा ना,
• यौन इच्छा में बदलाव,
• हताशाबेबसीतुच्छता या अपराध-बोध जैसी भावना,
• ध्यान केन्द्रित करने या निर्णय लेने में सक्षम  होना,
• ज्यादा चिड़चिड़ापन या क्रोध,
• स्पष्ट कारण के बिना ही ज्यादा चिंता या घबराहट महसूस होना,
• मृत्यु या आत्महत्या के विचार आना,
यदि आप कम से कम दो हफ्तों के लि  उपरोक्त में से किन्हीं भी लक्षणों का दिन के ज्यादातर समय अनुभव करते/करती हैं तो संभव है कि आप अवसाद से ग्रस्त हों।

अवसाद का होना कितनी सामान्य बात है?
अवसाद विश्व में एक सामान्य रूप से पाई जाने वाली बीमारी है। औरतों में यह और भी ज्यादा सामान्य है और यह बच्चों और युवाओं सहित सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। (ध्यान दें – बच्चों को भी यह रोग हो सकता है।)

अवसाद कैसे होता है?
अवसाद का सही-सही अतिमूल कारण ज्ञात नहीं है। अवसाद से जुड़े हुए कई कारक हैंजिनमें शामिल हैं:
• अवसाद का पारिवारिक इतिहास अर्थात परिवार में अन्य का भी इस रोग से ग्रसित होना। यह देखा गया है रक्त सम्बन्धी प्रथम रिश्तेदारों में यह रोग होने से अन्य में इस रोग के होने कि संभावना तुलनात्मक रूप में बढ़ जाती है।
• बेरोजगारीसम्बंधों में समस्याअकेलापन या प्रिय जन की मौत जैसी दुखद स्तिथियाँ  अन्य प्रकार की लम्बे समय तक चलने वाले रोग जैसे गठिया, शुगर, कैंसर इत्यादि के रोगियों में अवसाद होने कि संभावना ज्यादा रहती है। कई बार किसी स्पष्ट कारण के बिना भी अवसाद हो सकता है।
आधुनिक स्वरुप में यह माना गया है कि सभी मानसिक रोगों के कारक व्यक्ति कि अनुवांशिक संरचना, व्यक्ति का अपना मानसिक द्रष्टिकोण और वातावरणी संरचना का मिलाजुला प्रस्तुतीकरण होता है 

अवसाद के लिए किस प्रकार के उपचार उपलब्ध हैं?
अवसाद का इलाज पूर्ण रूप से संभव है। कुछ उपचार नीचे सूचीबद्ध हैं:
• अवसाद-रोधी (anti–depressantदवाओं से अवसाद के रोगियों को मदद मिल सकती है। लंबे समय तक इन दवाओं का प्रयोग बार-बार अवसाद की स्थिति आने और स्थिति बिगड़ने से रोकने में प्रभावी होता है। इन दवाओं का नुस्खा केवल मनोरोग विशेषज्ञ द्वारा ही दिया जा सकता है। परन्तु विशेषज्ञ कि अनउपलब्धता में आपके सामान्य चिकित्सक (GP) भी मददगार हो सकते हैं।
• बातचीत पर आधारित उपचार जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार (cognitive behaviour therapy) यानी CBT जैसे उपचार। इसके अंतर्गत किसी मनोरोग स्वास्थ्यकर्मी जैसे मनोचिकित्सकमनोवैज्ञानिकसामाजिक कार्यकर्ता या सलाहकार से बातचीत करना शामिल होता है। मनोचिकित्सा से व्यक्ति को समस्याओं को हल करने और चुनौतियों को झेलने में मदद मिल सकती है। ध्यान रहे कि दवाइयों का सेवन केवल मनोचिकित्सक कि सलाह से ही लेना है
• विद्युतीय आक्षेपी उपचार (Electro-Convulsive Therapy) यानी ECT ऐसे गंभीर किस्म के अवसादों के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी उपचार है जिनका इलाज दवाओं या अन्य उपचार-विधियों से नहीं हो पाया हो। यदि आपके लिए इस उपचार की अनुशंसा की जाती है तो आपका डॉक्टर ECT के बारे में आपको विस्तृत जानकारी दे सकता है। लेखक ने अपने सात सालों के अनुभव में ECT से किसी को नुकसान होते नहीं पाया है।
अवसाद के निराकरण के लिए अक्सर एक से ज्यादा और मिली-जुली उपचार पद्यतियों का प्रयोग होता है।


अवसाद-रोधी दवाएं कैसे काम करती हैं?

अवसाद-रोधी दवाएं मस्तिष्क में केमिकल्स के स्तर को बहाल करने और उन्हें बनाए रखने में मदद देती हैं जैसे serotonin, norepinephrine और dopamine। वे प्राय : अवसाद के लक्षणों को नियंत्रित करने में कारगर होती हैं और फिर से उनके उभरने को रोकने में सहायक होती हैं।

मुझे अवसाद-रोधी दवाएं देने के लिए मेरे डॉक्टर के लिए क्या जानना जरूरी है?
अपने लक्षणों और चिकित्सीय पृष्ठभूमि के बारे में अपने डॉक्टर को यथासंभव अधिक से अधिक जानकारी दें जिसमें यह जानकारी भी शामिल हो कि आपको वर्तमान समय में कोई बीमारी तो नहीं है या पहले कोई बीमारी तो नहीं थी। आप जो भी दवाएं और पारंपरिक या हर्बल औषधियां ले रहे/रही हों उनके बारे में अपने डॉक्टर को बताएं। इससे आपकी दवा के कार्य-प्रभाव पर असर पड़ सकता है। यदि आपको इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव हो तो तुरन्त अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। अवसाद-रोधी दवाओं के अनुषंगी प्रभावों के बारे में फार्मासिस्ट या औषधि -विशेषज्ञों से भी जानकारी मिल सकती हैलेकिन दवा की ख़ुराक में कोई भी परिवर्तन केवल आपके चिकित्सक द्वारा ही किया जाना चाहिए। अपने लक्षणों या अपनी दवा के कारण होने वाले अनुषंगी प्रभावों का रिकॉर्ड रखें। अपने डॉक्टर से मुलाकात के वक्त ये नोट्स अपने साथ ले जाएंऔर अवसाद-रोधी दवाएं आप पर कैसे कारगर हो रही हैं इस बारे में और अधिक जानकारी पाने के लिए अपने प्रश्न पूछें। आपके मित्र एवं परिवार के लोग सहायता और देखभाल के लिए महत्वपूर्ण हैं लेकिन ऐसा हो सकता है कि उनके पास आपके सवालों के सही-सही जवाब  हों। हर मरीज की स्थिति भिन्न होती है। अतयह जरूरी नहीं कि इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी बिल्कुल सही और आपकी रोग-दशा के अनुसार हो। अल्कोहल (वाइनबीयर और कॉकटेल सहित अन्य स्पिरिट-युक्त पेयका सेवन करने से बचें या इनके सेवन को सीमित करें। अल्कोहलतम्बाकू एवं अन्य मादक द्रव्य आपकी दवाओं के कारगर होने के तरीके पर असर डाल सकते हैं।

मेरा एक परिचित व्यक्ति भी अवसाद से ग्रस्त है। क्या मैं उसे अपनी दवाएं दे सकता/सकती हूं?
अपनी दवा किसी अन्य के साथ कभी भी साझी  करें। आपकी दवा खास तौर पर आपके मर्ज़ के लिए सुझाई गई है और वह आपके चिकत्सीय पृष्ठभूमि के अनुरूप है। आपकी दवा दूसरों के लिए हानिकारक हो सकती है। यदि आपके किसी परिचित व्यक्ति में भी आपके जैसे ही लक्षण दिख रहे हों तो उन्हें डॉक्टर के पास जाने के लिए प्रोत्साहित करें। यदि आप किसी शिशु को जन्म देने की योजना बना रही हों या अवसाद-रोधी दवा लेने के दौरान आप पहले से गर्भवती हों या स्तनपान करा रही हों तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।



मुझे अवसाद-रोधी दवाएं कब तक लेनी पड़ेंगी?
अवसाद-रोधी दवाओं से आपके लक्षण तुरन्त समाप्त नहीं हो जाएंगे। दवा के पूरे असर के लिएआपको आम-तौर पर नियमित रूप से अवसाद-रोधी दवाएं कई हफ़्तों तक लेने की आवश्यकता होती है। अवसाद से पूरी तरह स्वस्थ हो जाने के बाद भी आपको कुछ दिनों तक अवसाद-रोधी दवाएं लेने की आवश्यकता पड़ेगी। दवा की ख़ुराक में कोई भी बदलाव लाने से पहले अपने डॉक्टर से चर्चा कर लेनी चाहिए।



विभिन्न प्रकार की अवसाद-रोधी दवाएं कौन-कौन सी हैं?
अवसाद-रोधी दवाएं विभिन्न प्रकार की होती हैं। आपके लिए सबसे अच्छी दवा कौन-सी है यह पता लगाने के लिए आपको अपने डॉक्टर की निगरानी में अनेक प्रकार की अवसाद-रोधी दवाओं को परख कर देखने की आवश्यकता हो सकती है।


अवसाद-रोधी दवाओं के सामान्य अनुषंगी (Adverse/side effects) प्रभाव क्या हैं?
विभिन्न प्रकार के लोगों के लिए अलग-अलग अवसाद-रोधी दवाओं के अनुषंगी प्रभाव अलग-अलग प्रकार के होते हैं। अनुषंगी प्रभाव किसी दवा से होने वाली अनचाही प्रतिक्रिया को कहते हैं। अवसाद-रोधी दवाओं को लंबे समय तक कोई अनुषंगी प्रभाव उत्पन्न करने के रूप में नहीं जाना जाता है और उनकी लत भी नहीं लगती है।

अवसाद-रोधी दवाओं के प्रकार
१)      ट्राइसाइक्लि  अवसाद-रोधक दवाएं (TCAs)
ट्राइसाइक्लि  अवसाद-रोधक दवाएं काफी असरदार हो सकती हैं।
२)      सेलेक्टिव सिरोटोनिन रीअपटेक इन्हिबिटर्स (SSRIs)
इस प्रकार की अवसाद-रोधक दवाएं मस्तिष्क में पाए जाने वाले सिरोटोनि  नामक एक खास प्रकार के केमि कल को लक्षित करती हैं।
३)      सिरोटोनिन और नॉरऍड्रैनालिन रीअपटेक इन्हिबिटर्स (SNRIs)
सिरोटोनिन और नॉरऍड्रैनालिन रीअपटेक इन्हिबिटर्स मस्तिष्क में पाए जाने वाले दो प्रकार के केमिकल्स को लक्षित करते हैंसिरोटोनि  एवं नॉरऍड्रैनालिन।
४)      नॉरऍड्रैनालीन और विशिष्ट सिरोटोनर्जिक अवसाद-रोधी दवाएं (NaSSAs)
इस प्रकार की अवसाद-रोधी दवाएं तब सुझाई जा सकती हैं जब आप अत्यधिक चिन्तित रहने और नींद  आने जैसी समस्याओं से भी ग्रस्त हों। इस प्रकार की दवाएं भी मस्तिष्क में पाए जाने वाले दो प्रकार के केमिकल्स को लक्षित करती हैंसिरोटोनि  एवं नॉरऍड्रैनालाइन।

जब मैं स्वस्थ महसूस करने लगूं तो क्या मैं दवा लेना बंद कर सकता/सकती हूं?
आपको हमेशा अपनी दवाएं अपने डॉक्टर के निर् देशानुसार लेनी चाहिए। अपनी दवा की ख़ुराक में कोई परिवर्तन  करें। अपनी दवा का प्रयोग बंद करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से जरूर चर्चा कर लेनी चाहिए। अवसाद-रोधी दवाओं को अचानक बंद करने से आप गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

अवसाद का इलाज कितने समय तक चलता है?

अवसाद का इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि यदि यह रोग प्रथम बार हुआ है तो इलाज लगभग ९ से १२ महीनों तक चलता है। यदि एक से ज्यादा बार यह रोग हुआ है तो इसकी तीव्रता और प्रकरण के बीच दूरी पर निर्भर करता है कि इलाज कितना लम्बा चलेगा। इसी तरह अन्य कई कारक हैं जैसे साथ में अन्य मानसिक रोग का होना, साथ में व्यसन का शिकार होना, अनुवांशिक भार, न्यूरोलॉजी से सम्बंधित विकारों का साथ में होना, इत्यादि।